मुरशिद-ए-कामिल: मैं क्यूँ अल-मसीह का पैरोकार हो गया

मौलवी सफ़दर अली

मुरशिद-ए-कामिल:  मैं क्यूँ अल-मसीह का पैरोकार हो गया

मौलवी सफ़दर अली पहली जंग-ए-आज़ादी के बाद हज़रत ईसा के पैरोकार हो गए। इस कताबचे में वह बयान करते हें कि यह किस तरह और क्यूँ सरअन्जाम हुआ।