ज़िंदा कलाम 7: नजात की राह. हज़रत मूसा मिसर में
बख्तुल्लाह
हज़रत इब्राहीम की औलाद काल की वजह से मिस्र में टिक गई थी। वहाँ रहते हुए थोड़े लोगों से पूरी क़ौम बन गई। यह देखकर मिस्र का बादशाह उन पर ज़ुल्म ढाने लगा। तब ख़ुदा ने हज़रत मूसा से उन्हें नजात की राह दिखाई। इस वाक़िये से हम 5 सबक़ सीखते हैं~:
ख़ुदा सुनता है।
नजात का इंतज़ार करो।
नजात की बुलाहट सुनो।
नजात की राह क़बूल करो।
नजात की राह पर चल पड़ो।
