जिंदा कलाम 9: वफ़ादारी. सोने के बछड़े का सबक़
जब ख़ुदा इस्राईली क़ौम को मिस्र से निकाल लाया तो उनके लिए ईमान का सफ़र शुरू हुआ। चलते चलते वह सीना पहाड़ पर पहुँच गए। वहाँ ख़ुदा ने उन्हें ज़िंदगी की राह दिखाई। जो उस पर चल पड़े, उसके ख़ुदा और दूसरों के साथ ताल्लुक़ात बहाल रहते हैं। लेकिन सीना पहाड़ पर उन्हें एक और सबक़ भी सीखना था : वफ़ादारी का सबक़। सीना पहाड़ पर क़ौम ने वफ़ादारी के पाँच पहलू सीख लिए~:
ख़ुदा का अहद क़बूल करो।
अपने बुत मत बनाओ।
दूसरों की बेहतरी चाहो।
ख़ुदा की हुज़ूरी के लिए तड़पते रहो।
ख़ुदा की वफ़ादारी पर एतबार करो।
