ज़िंदा कलाम 10: मेरी जगह. क़ुरबानी का मक़सद
बख्तुल्लाह
सीना पहाड़ पर ख़ुदा ने इसराईलियों को ज़िंदगी की राह दिखाई। जो उस पर चल पड़े उसका ख़ुदा और दूसरों के साथ रिश्ता बहाल रहता है। शर्त यह है कि वह वफ़ादार रहे। लेकिन इनसान बार बार गुनाह में गिर जाता है। जवाब में ख़ुदा ने एक रास्ता खोल दिया~: क़ुरबानी का इंतज़ाम। क़ुरबानी से इनसान गुनाह से आज़ाद होकर दुबारा ख़ुदा के हुज़ूर आ सकता है। क़ुरबानी के पीछे दर्जे-ज़ैल ख़याल है~:
मेरी जगह बेऐबी।
मेरी जगह गुनाहगार।
मेरी जगह मौत की सज़ा।
मेरी जगह जान की क़ुरबानी।
लेकिन उस वक़्त की क़ुरबानियाँ नाकाफ़ी थीं। एक मुकम्मल क़ुरबानी की ज़रूरत थी। इसलिए दो मज़ीद बातें~:
असल क़ुरबानी ईसा मसीह है।
असल क़ुरबानी से बहाली यक़ीनी है।
