एह्सान-उल्लाह: जमाअत-ए-पंजाब का दाना मेमार

बर्कत-उल्लाह

एह्सान-उल्लाह: जमाअत-ए-पंजाब का दाना मेमार

जमाअत-ए-पंजाब किस तरह पैदा हुई? मुसन्निफ़ दिलचस्प तरीक़े से बयान करता है कि लाखों दबे हुए गुरोह किस तरह अल-मसीह के पैरोकार हो गए। बाद में जो बेदारी उन में शुरू हुई वह एह्सान-उल्लाह के बग़ैर तसव्वुर नहीं हो सकती। इबतिदा में जमाअत-ए-पंजाब के अक्सर लोग उनपढ़ और पस्तहाल थे। इस नाते से जो क़दम एह्सान-उल्लाह ने उठाए ताकि जमाअत ज़िन्दा और तरक़्क़ी-पज़ीर हो जाए वह आज भी काबिल-ए-ग़ौर हैं। इस हैरानकुन शख़्स ने शुरू ही से इस पर ज़ोर दिया कि जमाअत मग़रिब के पैसे न ले बल्कि ख़ुद-मुख़्तार रहे।